Tuesday, February 18, 2014

mai betab bahut tha dosto ko

दिल बेताब रहा दोस्तों को मिलने के लिए,
मगर क्या करते????
पैसे के अभाव में नेट धोखा दे गया। रैना"

मैं लहर हूं तुम साहिल हो जाओ,
फेसबुक के जैसे????
मेरी जिंदगी में शामिल हो जाओ। रैना" 

पति पत्नी से ????
तुम मेरे जीवन कि वाल पे ???
कुछ भी पोस्ट करदो ,
लाइक करना मेरी मजबूरी है। रैना"

मैं कवि नही ताबेदार हूं, 
लफ्जों की माला पिरोने के लिए,
मां सरस्वती ने नौकरी पे लगा रखा है। रैना"

यूँ ही चलती रहती कलम मेरी ,
वैसे मुझे अपनी भी होश नही।रैना "

वैसे बरबादी की जरूरत क्या है,
कलम से दोस्ती हो गई????
फिर शादी की जरूरत क्या है।
गर शादी हो गई????
फिर गाड़ी पटरी पे न आयेगी,
कलम तो चलती रहेगी????
वो रोयेगी चिलाएगी,
सरस्वती मां की पुजारन कलम,
सौतन कहलायेगी। रैना"    

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