मिलन जब दिल की तारों का उन तारों से होता है,
तारुफ़ इन्सान का तब ही मस्त बहारों से होता है,
दुल्हन कितनी रोई तड़फ़ी कोई और क्या जाने,
हीर कितनी बेबस थी पता ये कहारों को होता है। रैना"
जिसको अपनाया सपना सिलौना समझ कर,
वो तोड़ गया दिल मेरा खिलौना समझ कर। रैना"
No comments:
Post a Comment