गुल की फूटी ऐसी किस्मत,
खिलने से पहले मुरझाया,
ये लिख छोड़ा उसने पहले,
किसके हिस्से में क्या आया।रैना"
याद आई मां की नसीहत,
गांव की मिट्टी को मत भूल जाना।
तू अपने हाथ से बना लेना रोटी,
चाऊमीन बर्गर बाजारी मत खाना।
मां की बातों को मैंने लिया हल्के,
जारी रखा बाजारी खाकर मन बहलाना।
अब घेर लिया बीमारी ने मुझको,
मुश्किल हो गया पानी को भी पचाना।
अब याद आती बार बार मां की नसीहत,
चाऊमीन बर्गर बाजारी मत खाना।रैना
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