गिला करू तो कैसे तुझसे कोई रिश्ता न रहा,
शिकवा शिकायत तो अपनों से ही होती है। रैना"
इस अदा को क्या कहे,
मुस्करा मुस्करा कर दिल पे वार करते हो। रैना"
मेरा अपना हर इन्सान,
क्योकि इंसान में भगवान,
इसमें कोई भी शक नही,
सूफी की होती ये पहचान। रैना"
दुसरो को ????
माया से दूर रहने की?????
नसीहत देने वाले,
खुद पैसे पैसे पे मरते हैं,
वैसे दिखाने को भजन करते है। रैना"
शिकवा शिकायत तो अपनों से ही होती है। रैना"
इस अदा को क्या कहे,
मुस्करा मुस्करा कर दिल पे वार करते हो। रैना"
मेरा अपना हर इन्सान,
क्योकि इंसान में भगवान,
इसमें कोई भी शक नही,
सूफी की होती ये पहचान। रैना"
दुसरो को ????
माया से दूर रहने की?????
नसीहत देने वाले,
खुद पैसे पैसे पे मरते हैं,
वैसे दिखाने को भजन करते है। रैना"
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