क्या हमने कभी सोचा है ??????
वक्त कितना तेज चल रहा है,
जीवन रूपी सूरज ढल रहा है,
ऊँचा ग्लेशियर पिगल रहा है,
कारवां पास से निकल रहा है।
हम मस्ती में बसी बजा रहे है।
खुद को समझदार बता रहे है। रैना"
वक्त कितना तेज चल रहा है,
जीवन रूपी सूरज ढल रहा है,
ऊँचा ग्लेशियर पिगल रहा है,
कारवां पास से निकल रहा है।
हम मस्ती में बसी बजा रहे है।
खुद को समझदार बता रहे है। रैना"
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