Monday, April 14, 2014

tere ghar ka rasta btade

सामने आ इक बार,
करने है तेरे दीदार,
कब तलक भटकायेगा,
जीवन के दिन चार।
सामने आ इक -----
कहते हैं तू चंदा के जैसा,
मैं भी देखू तेरा मुखड़ा कैसा,
मनवा मेरा बेकरार।
सामने आ इक ---रैना"
सुप्रभात जी  …जय जय मां  

जब कोई सम्भल जाता है,
वो अक्सर बदल जाता है,
और जो बदलता नही,
वो नया इतिहास बनता है। रैना"  

No comments:

Post a Comment