दोस्तों दिल से पढ़ना जरा
सागर किनारे भी किसी को तरसते देखा,
नैनो से सावन बेहताशा बरसते देखा।
आशिक मरे बेमौत होता दर्द ही हासिल,
रोते किसी को बेचैन बेबस भटकते देखा।
बेख़ौफ़ होता है तमाशा बागवां रोये ,
बेवक़्त बेमौसम कली को चटकते देखा।
माँ बाप को उम्मीद थी औलाद से लेकिन,
माँ बाप को भूखे प्यासे तड़फते देखा।
रैना"नही अब देश की चिन्ता किसी को भी,
हर मोड़ पर बेजा दंगा ही भड़कते देखा।रैना"
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