वैष्णो माँ जय जय जय
वैष्णो माँ दूर कर दुःख प्यार तेरा चाहिये,
खैर हम माँ मांगते दीदार तेरा चाहिये।
तू जगत की है महारानी करे हम चाकरी,
अरज करते दास माँ उपकार तेरा चाहिये।
तेरे रंग में मन रंगे माँ भजन तेरे गाये हम,
पार भव से हो तभी दरबार तेरा चाहिये।
हैं दुखी मन रो रहा मिलता ठिकाना अब नही,
आस माँ तेरी लगी संसार तेरा चाहिये। रैना"
सुप्रभात जी ----------------जय जय माँ
वैष्णो माँ दूर कर दुःख प्यार तेरा चाहिये,
खैर हम माँ मांगते दीदार तेरा चाहिये।
तू जगत की है महारानी करे हम चाकरी,
अरज करते दास माँ उपकार तेरा चाहिये।
तेरे रंग में मन रंगे माँ भजन तेरे गाये हम,
पार भव से हो तभी दरबार तेरा चाहिये।
हैं दुखी मन रो रहा मिलता ठिकाना अब नही,
आस माँ तेरी लगी संसार तेरा चाहिये। रैना"
सुप्रभात जी ----------------जय जय माँ
No comments:
Post a Comment