दोस्तों देखना जी
हिम्मत कर टूटा अरमां पल जाये,
गिर गिर के दीवाना सम्भल जाये।
इस दुनिया में कुछ भी हो सकता है,
अपना ही अब अपने को छल जाये।
दिखता जो वो ही बिकता खुल के,
खोटा सिक्का भी अब तो चल जाये।
आतिश से सम्भल के खेलो अच्छा,
कर तो जलते हैं घर भी जल जाये।
रैना"का कहना खुद में ही रहना,
इस यौवन का क्या है कब ढल जाये। रैना"
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