Sunday, May 1, 2016

दर्द को हमने छुपा कर देखा,
आंख से दरिया बहा कर देखा। 
जागते कैसे नसीबा मेरे,
वक़्त ने नजरें चुरा कर देखा। 
वक़्त बदला तो सभी हैं बदले,
आंख सब ने ही बचा कर देखा।
चैन दिल को है मिला आराम सा,
जब गिरे को है उठा कर देखा। 
चांद निकला बात सी होने लगी,
चांदनी ने भी नहा कर देखा। 
काश परवाना करें ये शिकवा,
क्यों शमा को ही जला कर देखा। 
जाम रैना"नाम का ही पीना,
है मजा गर दिल लगा कर देखा। रैना"


 

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