Tuesday, May 10, 2016

जय जय माँ वैष्णो
तू इतनी सी किरपा कर माता,
कटे मजे से बाकी सफर माता।
मैं दर दर क्यों तुझे ढूंढा करू,
मेरे मन में कर ले घर माता।
यहां तो जैसे तैसे काट ली है,
मुझे आगे का बहुत डर माता।
तेरे नाम की भक्त्ति दे मुझको,
मेरी चाह न दौलत जर माता।
तेरे दीद करू दिल मेरा झूम उठे,
झोली रैना"की ख़ुशी से भर माता। रैना"
सुप्रभात जी -----जय जय माँ


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