मैं मुसाफिर भटकना नसीब मेरा,
है खफ़ा जो हमनवा हबीब मेरा।
जो कभी रहता रहा हसीन सपना,
आज वो हमदम बना रकीब मेरा।
पास मन्जिल के करें गिला हमेशा,
है नसीबा भी भला अजीब मेरा।
यार मेरे है नहीं यकीन काबिल,
मौत दे देगा मुझे तबीब मेरा।
इक ख़ता ने दी अजल सजा है,
रास्ता अब देखती सलीब मेरा।
अब गिला शिकवा नहीं अजीज रैना"
क्या करें जब प्यार बदनसीब मेरा। रैना"
है खफ़ा जो हमनवा हबीब मेरा।
जो कभी रहता रहा हसीन सपना,
आज वो हमदम बना रकीब मेरा।
पास मन्जिल के करें गिला हमेशा,
है नसीबा भी भला अजीब मेरा।
यार मेरे है नहीं यकीन काबिल,
मौत दे देगा मुझे तबीब मेरा।
इक ख़ता ने दी अजल सजा है,
रास्ता अब देखती सलीब मेरा।
अब गिला शिकवा नहीं अजीज रैना"
क्या करें जब प्यार बदनसीब मेरा। रैना"
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