दोस्तों के लिये
तूने यूं ही सताना है,
हमने तो मुस्कराना है।
हम जाने है तेरे घर को,
मेरे मन में ठिकाना है।
बदले तेवर घड़ी पल में,
कुछ ऐसा ही जमाना है।
कब बेजा है अजल आती,
बनता कोई बहाना है।
उल्फ़त की राह मुश्किल है,
खुद अपना घर जलाना है।
रैना"क्या ख़ाक बदले हम,
गम में डूबा तराना है। रैना"
तूने यूं ही सताना है,
हमने तो मुस्कराना है।
हम जाने है तेरे घर को,
मेरे मन में ठिकाना है।
बदले तेवर घड़ी पल में,
कुछ ऐसा ही जमाना है।
कब बेजा है अजल आती,
बनता कोई बहाना है।
उल्फ़त की राह मुश्किल है,
खुद अपना घर जलाना है।
रैना"क्या ख़ाक बदले हम,
गम में डूबा तराना है। रैना"
No comments:
Post a Comment