इन्सान तो ढंग से रो नहीं सकता,
ये बुत हरगिज खुदा हो नहीं सकता। रैना"
तलब अपनी भी गुमनाम रहने की है,
क्योकि शहर के लोग बदनाम बहुत है। रैना"
ये बुत हरगिज खुदा हो नहीं सकता। रैना"
तलब अपनी भी गुमनाम रहने की है,
क्योकि शहर के लोग बदनाम बहुत है। रैना"
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