हास्य व्यंग्य टोपी
हम ने भी अब पहननी टोपी पहनाने के लिये,
क्योकि यही हुनर बचा खुद को बचाने के लिये।
देखो न महात्मा गांधी ने नेहरू को टोपी पहनाई,
नेहरू ने जनता के सिर पे टिकाई और कुर्सी पाई।
इसी तरह अन्ना ने केजरीवाल को टोपी थमाई,
केजरीवाल ने दिल्ली में टोपी घुमाई कुर्सी हथयाई।
कवि भाइयों मेरा तो शत प्रतिशत यही ख्याल है,
हर क्षेत्र में बस टोपी का ही असल में कमाल है।
देखो जब से श्री वास्तव ने टोपी को हाथ लगाया,
उसने तब से हर मंच से मुंहू मांगा दाम पाया।
देखो न अब विश्वास पहले जैसा ही लिखता है,
पर टोपी के कारण अब पांच सात लाख में बिकता है।
इसलिये कवि भाइयों रैना"कहता है देर न लगाओ,
धड़ल्ले से टोपी पहनो और दूसरों को टोपी पहनाओ।
वर्ना मुश्किल में ही रहनी ये अति कीमती जान है,
यदि टोपी पहनाना सीख लोगे हो जाना कल्याण है। रैना"
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