माँ को समर्पित
है गुनगुनी सी धूप महकी सी हवा जैसी,
माँ तो इबादत है इनायत सी दुआ जैसी,
बेशक खुदा को तो कभी मैंने नहीं देखा,
मुझको लगे ये माँ मेरी रैना"खुदा जैसी। रैना"
है गुनगुनी सी धूप महकी सी हवा जैसी,
माँ तो इबादत है इनायत सी दुआ जैसी,
बेशक खुदा को तो कभी मैंने नहीं देखा,
मुझको लगे ये माँ मेरी रैना"खुदा जैसी। रैना"
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