श्याम तेरा नाम दिल पे लिखा है,
मोहिनी दासी तुझी पे फ़िदा है।
तू नहीं मिलता गिला है न शिकवा,
दूर आंखों से तू दिल में बसा है
फूल का खिलना महक बिखरती है,
खूब हसीं कातिल तेरी हर अदा है।
मैं तेरी मुझ में बसा तू ही काना,
क्यों खफा मुझसे हुआ तू जुदा है।
ढूंढते रहते तुझे मेरे ये नैना,
मैं दिवानी क्या तुझे ये पता है।
मोहिनी"की चाह हम से मिलो तुम,
माफ़ कर दो गर हुई जो खता हैं। मोहिनी"
मोहिनी दासी तुझी पे फ़िदा है।
तू नहीं मिलता गिला है न शिकवा,
दूर आंखों से तू दिल में बसा है
फूल का खिलना महक बिखरती है,
खूब हसीं कातिल तेरी हर अदा है।
मैं तेरी मुझ में बसा तू ही काना,
क्यों खफा मुझसे हुआ तू जुदा है।
ढूंढते रहते तुझे मेरे ये नैना,
मैं दिवानी क्या तुझे ये पता है।
मोहिनी"की चाह हम से मिलो तुम,
माफ़ कर दो गर हुई जो खता हैं। मोहिनी"
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