मेरे दिल की बात दोस्तों की महफ़िल में
मेरा हंसता हुआ चेहरा उसे रास नहीं आया,
वो मेरा अपना रहा फिर भी पास नहीं आया।
काट ली है अब तो जैसे तैसे खिंच कर हमने,
यूं जिंदगी में मजा तो कुछ ख़ास नहीं आया।
है यही काफ़ी तेरे कदमों में ही गुजरी अपनी,
ये ख़ुशी लौट कर घर अपने उदास नहीं आया।
तू रहा खाली कुछ भी हासिल नहीं कर पाया,
क्योंकि तुझको खुद पे ही विश्वास नहीं आया।
शिकायत तुझसे यही रही मेरे हमदम नसीब,
रैना"की जिंदगी में बहार का मास नहीं आया। रैना"
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