Saturday, April 30, 2016


खरी खरी -------
खूब मौज लगी है चोरों की,
कौन पकड़े सारे चोर यहां,
झूठ की वकालत होती है,
सच का न चलता जोर यहां।रैना"

जय जय वैष्णो माता,
मेरी माँ भी खफ़ा सी रहती है,
क्यों सुनती न कुछ कहती है,
अब छोड़ दे सारे शिकवे गिले,
मेरी आंख माँ झर झर बहती है। रैना"
सुप्रभात जी -----जय जय माँ
माया एकत्रित करनी इसलिये छोड़ दी मैंने,
कफ़न में जेब होती तो मैं कुछ सोचता देखो।रैना" 
सूफी कहना आसां है सूफी होना बड़ा मुश्किल,
जग की अग्नि में तप के सुर्खरू होना पड़ता है। रैना"
तड़फ रहे हम दुआ क्यों नहीं करते,
तबीबों तुम दवा क्यों नहीं करते,
बनी जा पे तुझे खबर नहीं लगता,
फ़र्ज़ अपना अदा क्यों नहीं करते। रैना"


दोस्तों गौर करना
तप के जो भी सुर्खरू होगा,
वो ही उसके रु ब रू होगा,
जो जैसा करेगा बिलकुल,
संग उसके भी हु ब हू होगा।  रैना"

Thursday, April 28, 2016




फकीरों का शहर लेकिन फकीरी कर रहे कितने,
जरा गिनती करो बेमौत हैं मर रहे कितने।
हकीकत से सदा हमने रखी दूरी यही सच है,
मगर हम झूठ के दम से खजाने भर रहे कितने।
नसीबों से शिकायत है नहीं बदले कभी रस्ता,
नहीं है चैन पलभर भी दिवाने लड़ रहे कितने।
खता करते मगर फिर भी सफ़ाई दे रहे अपनी,
कभी देखो वफ़ा के नाम पे दुःख जर रहे कितने।
सदा रैना"भला करना यही कहती मेरी माता,
जमाना हो गया बदली भलाई कर रहे कितने। रैना" 
वैष्णो माँ की जय
छोड़ के दुनियादारी को तेरा ध्यान करना माँ,
बज्म में मैं जहां बैठू तेरा गुणगान करना माँ,
खोल दे मन के द्वारे यही विनती गुजारिश माँ,
मैं भटका मुसाफिर हूँ मेरा कल्याण करना माँ। रैना"
सुप्रभात जी --------------------जय जय माँ

Wednesday, April 27, 2016

वैष्णो माँ की जय जय जय
वैष्णो माँ हमने तेरा दीदार करना है,
अब टूट कर तुझको प्यार करना है,
आकर सामने बैठो कहे दिल की बातें,
मोहब्बतें पाक का अब इज़हार करना है। रैना"
सुप्रभात जी -----------जय जय माँ 
लगा लो तुम गले मुझको नहीं कोई सहारा है,
अजल तेरे बिना मेरा न होना अब गुजारा है,
नहीं कोई दवा देता निरन्तर दर्द बढ़ता है,
कहे रैना"चली आओ दुःखी दिल ने पुकारा है।रैना"
अजल=मौत  

Tuesday, April 26, 2016


वैष्णो माँ की जय जय जय
जब नजर न आये सहारा कोई बोलो जय जय माँ,
जब नजर न आये किनारा कोई बोलो जय जय माँ,
माँ आ कर हाथ पकड़ लेगी दुःख सारे हर लेगी रैना"
जब नजर न आये प्यारा कोई बोलो जय जय माँ। रैना"
वो फूल तेरी उल्फ़त के तो मुरझा गये कब के,
लेकिन दिल के आंगन में पत्ते अब तक बिखरे हैं। रैना"

मेहनत पर भरोसा है मगर ये कड़वी सच्चाई है,
देख कर हाथों में छालें किस्मत खिल खिल हंसती है। रैना"

हमें फुरसत नहीं गम से नसीबो से शिकायत है,
नसीबा हंस के कहते हैं कर्म तेरे हुये ऐसे। रैना"



Monday, April 25, 2016

हम तो कांटों से बच कर पत्ते तोड़ते,
फूल जिनकी किस्मत में वो ले गये। रैना"
काम में जब भी मसरुफ़ होते,
याद तेरी खलल डाल देती। रैना"

वही रंग ढंग फिर भी खुद को जुदा समझे,
यहां ऐसे लोग भी जो खुद को खुदा समझे।
गिला उनसे भला कोई करें भी किसलिये,
वफ़ा को जो लोग बेवजह ही खता समझे।रैना"  

Sunday, April 24, 2016

वैष्णो माँ की जय जय जय
मेरी माँ क्यों खफ़ा सी रहती हो,
चुपचाप भला क्यों सामने बैठी हो,
कुछ अपना हुक्म फरमा माता,
ऊँगली पकड़ के मुझे चला माता।
मेरी आंखों प्यास बुझा माता,
मुझे अपने दर्श दिखा माता।
तेरी भक्ति में जीवन बितायेंगे,
जय माँ जय माँ हरपल ध्यायेगे। रैना"
सुप्रभात जी -----जय जय माँ

गर मिलता मेहनत के हिसाब से,
तो मजदूर ताउम्र गढ्ढे न खोदता। रैना"

ये सच किस्मत के बिना अकेली मेहनत अधूरी है,
मेहनत के साथ किस्मत का तड़का अति जरूरी है। रैना" 
उल्फ़त की चिता जले तो मुद्दत हो गई,
ये क्या राख़ से अब भी धुआं उठ रहा। रैना"


Saturday, April 23, 2016

तस्वीर मैंने तो अपनी कई बार है  बदली,
तकदीर पत्थर दिल को जरा तरस नहीं आया।रैना" 
नहीं आता नजर लेकिन यही एहसास होता है,
हसीं दिलबर सनम मेरा खड़ा वो पास होता है। रैना"
नये अन्दाज में हम ने जाना बज्म में उसकी,
रुतबा देख कर अपना सवाल वो भूल जायेगा।रैना"

सियासत की नज़र में तो बड़ा ही फर्क होता है,
करें है वोट की गिनती उसी अन्दाज में देखे है।रैना"
क़लम को है नसीबों से शिकायत सी,
क्यों हैं लफ्ज़ मेरे बेजुबां अब तक। रैना"

खफ़ा क़िस्मत हुई हम से जिधर देखो परेशानी,
बने क्यों काम बिगड़े मेहनत करती शिकायत है। रैना"

कहने को गाड़ियों का शोर है,
दिन रात बागी इंसान दौड़ते हैं। रैना"

Friday, April 22, 2016

वैष्णो माँ की जय जय जय
नहीं कोई सहारा माँ बहुत ही दूर मन्जिल है,
तेरा ये भक़्त मुश्किल में मेरी फरियाद सुन ले माँ।
किसे अब हम कहे अपना सभी है यार मतलब के,
अगर माँ तुम करो किरपा बनेगी बात तब मेरी। रैना"
सुप्रभात जी --------------------जय जय माँ 
चाहत को किसी की नज़र है लगी,
जिसे हम चाहते वो मिलता ही नहीं। रैना"


Thursday, April 21, 2016

वैष्णो माँ की जय
दुःख दूर कर माता सारे,
परेशान भक्त तेरे प्यारे,
तुम सब कुछ जाने माँ,
भक्त तेरे गम के हैं मारे। रैना"

गिरगिट हैं अब लुप्त होने की कगार पर,
आदमी ने ये रूप धारण कर लिया। रैना"



याद आये वो जमाना दोस्तों,
बाग़ से अमियां चुराना दोस्तों,
डांटना माँ का नहीं है भूलता,
छुप के जोहड़ में नहाना दोस्तों। रैना"
लोग बेहिसाब दिन भर भटकते,
अपनी तो सुबह ही शाम हो गई। रैना"
इक हसीं ने देख कर सिर झुका दिया,
घन्टियां मन के मंदिर में बजी बहुत। रैना"

Tuesday, April 19, 2016

जिंदगी कलम के नाम हो जायेगी,
यूं लिखते लिखते शाम हो जायेगी।रैना" 
वैष्णो माता की जय
जो माँ तेरा प्यार नहीं मिलता,
फिर मन को करार नहीं मिलता,
बंद हो किस्मत के दरवाजें,
खुशियों का संसार नहीं मिलता।
मेरा भी माँ दिल ये टूटा हैं,
अफ़सोस बहारों ने लूटा है।
मुझ पे उपकार कर दे माँ,
जीवन में सुधार कर दे माँ। रैना"
सुप्रभात जी ----जय जय माँ


ये कैसी विडंबना ?????//
बेचारे कुत्ते जिसका खाते उसी के हो जाते,
चाहे मारो जूते डण्डे फिर भी पुंछ हिलाते,
लेकिन इंसान जिसका खाते उसको गुर्राते,
मौका लगते ही जोर से बोटी काट खाते।
फिर भी खुद को अव्वल दर्जे का जीव बताते। रैना"

Monday, April 18, 2016

वैष्णो माता की जय
जय जय माँ  बोलो जय जय माँ,
खुल जायेगे मन के द्वारे,
मिट जायेंगे दुःख ये सारे,
हो जायेगी माँ की किरपा,
रैना"मन न रहेगा परेशां।
जय जय माँ  बोलो जय जय माँ। रैना"
सुप्रभात जी ----जय जय माँ 
जिसे दिन को रात कहने का फन आता है,
निसंदेह वो तो बड़ा आदमी बन जाता है। रैना"

Sunday, April 17, 2016

मिलता सब नसीबों से नहीं शक की गुंजाइश है,
किसी मजदूर के हिस्से कभी हीरा नहीं आता। रैना"

वैष्णो माँ तेरी जय जयकार
अगर होती तेरी किरपा तेरा दीदार कर लेते,
न रहते हम परेशां से जो तुझ से प्यार कर लेते,
लगी रहती यही चिन्ता किसे अपना कहे रैना"
मेरी माता करम करदो सफ़ीना पार कर लेते। रैना"
सुप्रभात जी -----------------------जय जय माँ 

Saturday, April 16, 2016

जय जय जय माँ वैष्णो माता
भरोसा है मुझे तेरा नहीं चिन्ता फ़िकर कोई,
चढ़ी है नाम की मस्ती न आता गम इधर कोई,
दिवाने हम हुये तेरे मजा अब आ रहा माता,
तेरे कदमों में दुनिया नहीं ऊँचा शिखर कोई। रैना"
सुप्रभात जी ---------------------जय जय माँ

Wednesday, April 13, 2016

जला के घर मेरा देखो खड़ा वो मुस्कराता है,
बुरा कैसे कहे उसको मेरा दिल रूठ जाता है,
खबर उसको रहे इतनी नहीं हम आज के साथी,
बसा वो रूह में मेरी पुराना उस से नाता है। रैना"
   
किस्मत को बदलने की हिम्मत रखते है,
पानी पीने के खातिर कुआं खोद लेते है। रैना"
धुंआ दिल में उठा होगा तभी तो आंख छलकी है,
लगे जब आग जोरो से तो पानी सूख जाता है। रैना"
बुराई कर के बीवी की मर्द मंद मंद से हंसते हैं,
मगर ये भूल जाते हैं की घर को कौन सम्भाले। रैना"
कभी तू सोचना भी मत तुझे हम भूल पायेंगे,
ख़बर इतनी बिना तेरे घड़ी पल रह न पायेंगे,
बड़ी बेदर्द यादों ने नहीं छोड़ा कहीं का भी,
यही अन्जाम होगा अब जहर हम चाट जायेंगे। रैना"

किसी से मांग ले कैसे यहां सब ही भिखारी हैं,
फ़रेबी हैं बड़े जालिम फकत धन के पुजारी हैं,
खता करते यहां अपने शिकायत क्या करें कोई,
लगेगी दाव पर द्रोपदी यहां सब ही जुआरी हैं। रैना"

Tuesday, April 12, 2016

अब तो रो कर भी मन हल्का नाही होता,
गम की गठरी निरंतर भारी होती जाये। रैना"
होश कर खुद को छला न कर,
देख दूजे को जला न कर।
तू सुबह महकी किरण जैसा,
शाम के मांनिद ढला न कर। रैना"



जय जय वैष्णो माता जी
मेरी माता तेरी किरपा भक्तों पे बनाये रख,
भक्त तेरे परेशां से तू चरणों से लगाये रख।
बुरा करती नहीं माता बुरे होते सदा बच्चें,
चले हम नेक रस्ते पर बुराई से बचाये रख।
मेरी माँ तू बड़ी भोली सुना दुःख दूर कर देती,
हमें भी बख़्श देना माँ करम हम पे कमाये रख।
शुरू नवरात्रे तेरे करें गुणगान तेरी भक्ती,
चढ़ी हो नाम की मस्ती लगन मन में बढ़ाये रख।
इबादत हम करें तेरी रहे मतलब न कोई माँ,
भुलाना हैं हमें खुद को मेरे मन को जगाये रख।
दिखा सूरत तेरी माता यही अरमान रैना" का,
न हो दीदार जब तक जोत तब तक माँ जलाये रख। रैना"

Thursday, April 7, 2016

वैष्णो माता की जय
प्रथम शैलपुत्री मेरी माता,
तुम हो जगत आधार विधाता,
तेरी जय जय कार, माता तेरी जय जयकार।
दुःख हरती माँ मंगल करती,
भक्तों की खाली झोली भरती,
सब पे करती उपकार।
तेरी जय जय कार, माता तेरी जय जयकार।
हाथ त्रिशूल कमल विराजे,
भोली भाली माँ प्यारी लागे,
तेरी पूजा करें संसार।
तेरी जय जय कार, माता तेरी जय जयकार।
रैना"पे इतनी मेहर माँ कर दे,
तेरी भक्ती का मेरी माँ वर दे,
यही विनती करो स्वीकार।
तेरी जय जय कार, माता तेरी जय जयकार।रैना"
सुप्रभात जी,नवरात्रों की शुभकामनायें जी
जय जय माँ जय जय माँ


टूटे हुये दिल से सदा निकले,
तुम बावफ़ा क्यों बेवफ़ा निकले।
तब याद अंगड़ाई लेती तौबा,
जब पास से महकी हवा निकले।
बरबाद हम होते रहे फिर भी,
तेरे लिये दिल से दुआ निकले।
सुन अर्ज मेरी तू हटा चिलमन,
तब ही मिलन का रास्ता निकले।
जिनसे रहा मुझको गिला अक्सर,
वो यार तो मेरे खुदा निकले।
माँ की दुआ है साथ में हरदम,
रैना"तभी हम बा 

Wednesday, April 6, 2016

तुम गर कान के न कच्चे होते,
फिर साथी तेरे हम अच्छे होते।
आबाद होता फिर हसीं गुलशन,
अपने भी दो चार तो बच्चें होते। 
पीज़ा बर्गर नशे न खुले बिकते,
फिर तो बच्चें हट्टे कट्टे होते।
अधिकतर झूठ का ले लेते ठेका,
राजनेता हरगिज न सच्चे होते।
जो भारत माँ की जय न बोलते,
वो धोखेबाज गद्दार पक्के होते।
किसी एक का नाम मत लेना,
राजनीति में बहुत से छक्के होते।
बेईमान तो चलाता खूब अपनी,
ईमानदार के साथ ही धक्के होते।
रैना"गर पहले ही सम्भल जाते,
फिर इस कदर न हक्के बक्के होते। रैना"
 
मुहं की बार बार खाई,
फिर महबूबा याद आई,
कुर्सी मोह त्यागे नहीं,
तभी भाजपा ने मिल कर फिर सरकार बनाई,
 मन करता है गीत गाऊ घर में बैठ कर,
अफ़सोस बीवी को देख आवाज़ गुम हो जाती। रैना"

Tuesday, April 5, 2016

दोस्तों  के लिये
कुछ लोग बेजा फितूर करते हैं,
रंग रूप का यूं गरूर करते है।
जग का न कुछ भी बिगाड़ पाते हैं,
नुकसान अपना जरूर करते हैं।
बद को कभी राह ही नहीं मिलती,
खुद को मंजिल से दूर करते है।
शब भर नैन जागते रहे अक़्सर,
जो इश्क में दिल को चूर करते हैं।
सब है उसी का वजूद उसका ही,
रैना"भला क्यों फितूर करते हैं। रैना"
वैष्णो माँ की जय जय जय
मेरी माँ मुझे चरणों की भक्ति दे,
मैं करू भक्ति माँ इतनी शक्ति दे,
कट जाये मेरे जन्मों के बंधन,
खैर मांगे माँ हमको मुक्ति दे। रैना"
सुप्रभात जी ---जय जय माँ 

Monday, April 4, 2016

वैष्णो माँ की जय जय जय
दीवानें आ बैठे तेरे दर माता,
तेरे चरणों में अपना घर माता,
हम तुझ से और कुछ न मांगे,
कर रहम की इक नजर माता।
इस दुनिया के बहुत रंग हुये,
बड़ी मुश्किल लगता डर माता।
तू भी सुनती न फरियाद मेरी,
हम कैसे कर ले सबर माता।
किस दौर से हम हैं गुजर रहे,
ये तुझको भी है ख़बर माता।
रैना"के मन में अपना घर कर ले,
कटे मजे से बाकी सफ़र माता। रैना"
सुप्रभात जी -------जय जय माँ

Sunday, April 3, 2016

वैष्णो माँ की जय जय जय
ले के श्रदा जो मन में आये कोई,
गर प्रीत की रीत निभाये कोई,
उसे मुहु मांगा वर मिल जाता,
माँ के दर से न खाली जाये कोई। रैना"
सुप्रभात जी ------जय जय माँ





गुस्ताखी माफ़
माँ बाप से तो तकरार करें,
कुत्ते से टूट के प्यार करें।
इंसान की सूरत बदल गई,
रंग बदली बार बार करें।
मेहनत से कन्नी काट रहा,
माल मुफ्त का स्वीकार करें।
हुस्न के जलवें कम से हुये,
सुर्खी से लब गुलजार करें।
इश्क आदी नशे का हो रहा,
जीना अपना ही दुश्वार करें।
युवा ढूंढे जवानी डिब्बों में,
कसरत से तो इन्कार करें।
सोच हमने अपनी न बदली,
क्या ख़ाक फिर सरकार करें।
जाने वाले लौट के न आते,
रैना"किसका तू इंतजार करें। रैना"

मेरे भाइयों का दर्द
सियासतदान हमदर्द नहीं झूठ बकते हैं,
उजड़े घर आज भी हमारी राह तकते हैं।
हमारी सुनने वाला कोई नहीं सब फरेबी,
कहे क्या अखबारों में लेख बहुत छपते हैं।
मुहाजिर हो गये अपने देश में बदनसीब,
सभी चुप हमारी बरबादी के लड्डू बटते हैं।
क्या नहीं किया हमने देश धर्म के खातिर,
अफ़सोस फिर भी हम अपमान चखते हैं। 
घटी एक घटना कलमकार दुखी होने लगे,
नहीं हम इंसान इसलिये सब पीछे हटते हैं।
क्या न हुआ हमारे साथ मौत का नंगा नाच,
याद कर उन लम्हों को हमारे सीने फटते हैं। 
काश कोई सुने हमारी पुकार यही सदा रैना"
दिल पे लगे जख्म नासूर बने न भरते हैं। रैना"

Saturday, April 2, 2016

वैष्णो माँ की जय जय जय
कोई हम से ख़ता हो गई,
मेरी माँ क्यों खफ़ा हो गई,
जीने का अब सहारा नहीं,
जीते जी ही कजा हो गई।
अब रोना है हमें ता उम्र,
ऐसी माँ की रजा हो गई।
मेरी माँ काश पीड़ा सुने,
कुछ ज्यादा ही सज़ा हो गई।
जिसको माँ का सहारा मिला,
रैना" जिंदगी मज़ा हो गई। रैना"
सुप्रभात जी ----जय जय माँ

Friday, April 1, 2016

वो खफ़ा क्यों हुये हम नहीं जानते,
की गुजारिश मगर वो नहीं मानते,
दर्द सा अब उठा जान जाने लगी,
काश वो हाथ मेरा पकड़ थामते।
अब मेरी जिन्दगी है तमाशा बनी,
ख़ाक गलियों की हम अब फिरे छानते।
है शिकायत गिला तो यही दिलरुबा,
तीर मेरी तरफ़ क्यों रहे तानते।
भूल जाना तुझे याद आना नहीं,
कर दिखाते अगर दिल में हम ठानते।
अर्ज मेरी यही तू कभी सुन मेरी,
दीद की है तलब हम यही मांगते। रैना" 
वैष्णो माँ की जय
तेरी नजरे इनायत माँ खिले हैं फूल गुलशन में,
मिली इज्जत मुहब्बत माँ कोई मुश्किल न जीवन में,
तमन्ना इक बची बाकी करो उसको अभी पूरी,
मुझे आबाद कर माता बना लो घर मेरे मन में। रैना"
सुप्रभात जी ------------------------जय जय माँ 
गुम हो गये वो ढूंढते हम फिरे,
अब ख़ाक सी यूं छानते हम फिरे।
है पास फिर भी दूर वो क्यों रहे,
उसका पता अब पूछते हम फिरे।
हां इश्क में अब तो यही हो रहा,
बेहाल से यूं भागते हम फिरे।
अब सोचते है बैठ तन्हा कभी,
क्यों भीख़ सी यूं मांगते हम फिरे।रैना"