दोस्तों के लिये
कुछ लोग बेजा फितूर करते हैं,
रंग रूप का यूं गरूर करते है।
जग का न कुछ भी बिगाड़ पाते हैं,
नुकसान अपना जरूर करते हैं।
बद को कभी राह ही नहीं मिलती,
खुद को मंजिल से दूर करते है।
शब भर नैन जागते रहे अक़्सर,
जो इश्क में दिल को चूर करते हैं।
सब है उसी का वजूद उसका ही,
रैना"भला क्यों फितूर करते हैं। रैना"
कुछ लोग बेजा फितूर करते हैं,
रंग रूप का यूं गरूर करते है।
जग का न कुछ भी बिगाड़ पाते हैं,
नुकसान अपना जरूर करते हैं।
बद को कभी राह ही नहीं मिलती,
खुद को मंजिल से दूर करते है।
शब भर नैन जागते रहे अक़्सर,
जो इश्क में दिल को चूर करते हैं।
सब है उसी का वजूद उसका ही,
रैना"भला क्यों फितूर करते हैं। रैना"
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