Saturday, April 23, 2016

क़लम को है नसीबों से शिकायत सी,
क्यों हैं लफ्ज़ मेरे बेजुबां अब तक। रैना"

खफ़ा क़िस्मत हुई हम से जिधर देखो परेशानी,
बने क्यों काम बिगड़े मेहनत करती शिकायत है। रैना"

कहने को गाड़ियों का शोर है,
दिन रात बागी इंसान दौड़ते हैं। रैना"

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