Saturday, April 2, 2016

वैष्णो माँ की जय जय जय
कोई हम से ख़ता हो गई,
मेरी माँ क्यों खफ़ा हो गई,
जीने का अब सहारा नहीं,
जीते जी ही कजा हो गई।
अब रोना है हमें ता उम्र,
ऐसी माँ की रजा हो गई।
मेरी माँ काश पीड़ा सुने,
कुछ ज्यादा ही सज़ा हो गई।
जिसको माँ का सहारा मिला,
रैना" जिंदगी मज़ा हो गई। रैना"
सुप्रभात जी ----जय जय माँ

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