Monday, April 25, 2016

काम में जब भी मसरुफ़ होते,
याद तेरी खलल डाल देती। रैना"

वही रंग ढंग फिर भी खुद को जुदा समझे,
यहां ऐसे लोग भी जो खुद को खुदा समझे।
गिला उनसे भला कोई करें भी किसलिये,
वफ़ा को जो लोग बेवजह ही खता समझे।रैना"  

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