Sunday, April 3, 2016


गुस्ताखी माफ़
माँ बाप से तो तकरार करें,
कुत्ते से टूट के प्यार करें।
इंसान की सूरत बदल गई,
रंग बदली बार बार करें।
मेहनत से कन्नी काट रहा,
माल मुफ्त का स्वीकार करें।
हुस्न के जलवें कम से हुये,
सुर्खी से लब गुलजार करें।
इश्क आदी नशे का हो रहा,
जीना अपना ही दुश्वार करें।
युवा ढूंढे जवानी डिब्बों में,
कसरत से तो इन्कार करें।
सोच हमने अपनी न बदली,
क्या ख़ाक फिर सरकार करें।
जाने वाले लौट के न आते,
रैना"किसका तू इंतजार करें। रैना"

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