दोस्तों आप के लिए खास
रात में भी नींद आती नही,
याद उनकी लौट जाती नही।
इश्क़ ने बेहाल कर ही दिया,
आग भड़के है जलाती नही।
क्यों डरी सी जिन्दगी है भला,
मौत किसको आ बुलाती नही।
शाम ढलती ख़ास अन्दाज से,
जख़्म अपना वो दिखाती नही।
है बड़ी बेदर्द दुनिया सही,
आग भड़काये बुझाती नही।
देश का खा दे रहा है गाली,
बेहया को शर्म आती नही।
आजकल का दौर ही बेवफ़ा,
लाज मुखड़ा यूं छुपाती नही। रैना"
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