कभी हंस कर करो सजिदा यही कहता दिवाना है,
कहीं दिल ओर है भटके कहीं मारा निशाना है।
भला है क्यों रखी दूरी सदा महबूब से अपने,
न उससे दिल लगाने का बता अब क्या बहाना है।
धुंआ उठता नज़र आये जला है घर लगे तेरा,
तुझे चिन्ता नही अपनी कहे खुद घर जलाना है।
न करता प्यार की बातें सदा उल्टा ही बोले है,
ख़ुशी की बात हो लेकिन गाये गम का तराना है।
कहीं दिल ओर है भटके कहीं मारा निशाना है।
भला है क्यों रखी दूरी सदा महबूब से अपने,
न उससे दिल लगाने का बता अब क्या बहाना है।
धुंआ उठता नज़र आये जला है घर लगे तेरा,
तुझे चिन्ता नही अपनी कहे खुद घर जलाना है।
न करता प्यार की बातें सदा उल्टा ही बोले है,
ख़ुशी की बात हो लेकिन गाये गम का तराना है।
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