Wednesday, March 9, 2016

                   ग़ज़ल
तेरी आंखो से छलके शराब जैसे,
पी रखी मैंने भी बेहिसाब जैसे।
हर अदा खूब है दिल हुआ दिवाना,
हो सुबह का हसीं आफ़ताब जैसे।
हल नही जो हुआ है सवाल हम से,
मिल गया है उसी का जवाब जैसे। 
राज कोई छुपा के रखा नही है,
जिन्दगी है खुली सी किताब जैसे।
देश में शोर ऐसा मचा हुआ है,
हो गये ख़ास कुछ बेनक़ाब जैसे।
काश रैना"कभी तो बहार आती,
दो घड़ी ठाट होते नवाब जैसे। रैना"



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