वैष्णो माँ की जय
है तलब माँ तेरे दर्शन की,मेरे मन की प्यास बुझा दे माँ,
मैं भटका हुआ मुसाफिर हूं,मेरी मंजिल का पता दे माँ।
वक़्त की गहरी चोटों से,दिल मेरा ये टूट के बिखर गया,
वैष्णो रानी पतवार है तू,टूटी कश्ती किनारे लगा दे माँ। रैना"
सुप्रभात जी -----------------------------जय जय माँ
है तलब माँ तेरे दर्शन की,मेरे मन की प्यास बुझा दे माँ,
मैं भटका हुआ मुसाफिर हूं,मेरी मंजिल का पता दे माँ।
वक़्त की गहरी चोटों से,दिल मेरा ये टूट के बिखर गया,
वैष्णो रानी पतवार है तू,टूटी कश्ती किनारे लगा दे माँ। रैना"
सुप्रभात जी -----------------------------जय जय माँ
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