दोस्तों मेरी गज़लें आप के लिए होती हैं
ख़्वाब में आना जगाना याद आये,
आज भी गुजरा जमाना याद आये।
बाद मुद्दत भी न सूखा जख़्म दिल का,
उस कली का मुस्कराना याद आये।
बिछुड़ कर उनसे मरे बेमौत हम तो,
अब न जीने का बहाना याद आये।
गांव को हम छोड़ कर आये शहर में,
बाग़ में हंसना हंसाना याद आये।
अब तमन्ना है यही अरमान बाकी,
हर घड़ी दिलकश ठिकाना याद आये। रैना"
ख़्वाब में आना जगाना याद आये,
आज भी गुजरा जमाना याद आये।
बाद मुद्दत भी न सूखा जख़्म दिल का,
उस कली का मुस्कराना याद आये।
बिछुड़ कर उनसे मरे बेमौत हम तो,
अब न जीने का बहाना याद आये।
गांव को हम छोड़ कर आये शहर में,
बाग़ में हंसना हंसाना याद आये।
अब तमन्ना है यही अरमान बाकी,
हर घड़ी दिलकश ठिकाना याद आये। रैना"
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