मस्त शायर लिखता न करता इबादत ,
मेरी कलम के दीवाने उसके आशिक हैं। रैना"
बेटियों की शान में कविता
बेटी बचाओ के नारे मचा शोर है,
वो ही मचाये शोर जो बड़ा चोर है।
नासमझों गर बेटियों को बचाना है,
फिर बेवजह झूठा शोर न मचाना है।
बेटियों को खूब पढ़ाना लिखाना है,
पढ़ा लिखा बेटी को आगे बढ़ाना है।
बेटी को पूरा मान सम्मान दिलाना है,
सारे समाज को इस बारे जगाना है।
जब सारा देश समाज समझ जायेगा,
फिर कोई अजन्मी की बलि न चढ़ायेगा।
इसलिए रैना"कहता बेजा शोर न मचाओ,
बेटी बचाने से पहले कुरीतियां मिटाओ।
फिर अजन्मी को कोई न मारे गा। रैना"
मेरी कलम के दीवाने उसके आशिक हैं। रैना"
बेटियों की शान में कविता
बेटी बचाओ के नारे मचा शोर है,
वो ही मचाये शोर जो बड़ा चोर है।
नासमझों गर बेटियों को बचाना है,
फिर बेवजह झूठा शोर न मचाना है।
बेटियों को खूब पढ़ाना लिखाना है,
पढ़ा लिखा बेटी को आगे बढ़ाना है।
बेटी को पूरा मान सम्मान दिलाना है,
सारे समाज को इस बारे जगाना है।
जब सारा देश समाज समझ जायेगा,
फिर कोई अजन्मी की बलि न चढ़ायेगा।
इसलिए रैना"कहता बेजा शोर न मचाओ,
बेटी बचाने से पहले कुरीतियां मिटाओ।
फिर अजन्मी को कोई न मारे गा। रैना"
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