Saturday, January 3, 2015

मिसरा -1 
कोई मेहमां जो आता है तो क़िस्मत लेके आता है
1222 1222 1222 1222


नही कोई किसी को यूं पिलाता कुछ खिलाता है,
उसी पे मर मिटे "रैना" जहां कुछ नज़र आता है।
यही फितरत हुई अन्दाज बदले इस जमाने का,
जहां से कुछ मिले हासिल उसी से दिल लगाता है।रैना"
 गुस्ताखी माफ़ 
खूबसूरत हो बहुत हसीन भी हो,
कुरमुरी सी तुम नमकीन भी हो।
इतनी हसीन अदाएं दिखाया न करो,
दिल जलो को यूं और जलाया न करो। 
हुस्न की बातें खलेआम न कहा करो,
बुरी नजरो से जरा बच के रहा करो। रैना"

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