पास तेरे आने का बहाना न मिला,
रात दिन ढूंढा है पर ठिकाना न मिला,
तू रहे किस बस्ती में किसी को न पता,
दे पता तेरा कोई सयाना न मिला। रैना"दिल
गुस्ताखी माफ़
दिल्ली में आजकल फिर मफरल की धूम है,
लोग उसे चाहते तो है लेकिन डरते भी है,
कही फिर छत पे चढ़ के भाग न जाये। रैना"
रात दिन ढूंढा है पर ठिकाना न मिला,
तू रहे किस बस्ती में किसी को न पता,
दे पता तेरा कोई सयाना न मिला। रैना"दिल
गुस्ताखी माफ़
दिल्ली में आजकल फिर मफरल की धूम है,
लोग उसे चाहते तो है लेकिन डरते भी है,
कही फिर छत पे चढ़ के भाग न जाये। रैना"
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