तक़दीर तो तस्वीर बदल देती,
पक्की लिखी तहरीर बदल देती,
ये खेल तो तकदीर का ही है,
अन्दाज अपना हीर बदल देती। रैना"
'' NAHIn ''
चांदनी रात मुझको नही भाती,
रात भर आंख जो लग नही पाती। रैना"
पक्की लिखी तहरीर बदल देती,
ये खेल तो तकदीर का ही है,
अन्दाज अपना हीर बदल देती। रैना"
'' NAHIn ''
चांदनी रात मुझको नही भाती,
रात भर आंख जो लग नही पाती। रैना"
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