रैना की कलम से दोस्तों की नजर देखता हूं
दोस्तों को कितनी पसंद आती है ये रचना ??????
साकी ने आजकल पिलाना छोड़ दिया है,
हमने ने भी मैखाने में जाना छोड़ दिया है।
अब बेवफा दोस्तों की बाढ़ सी आ गई,
हर किसी को दोस्त बनाना छोड़ दिया है।
सच आतिशे इश्क में दिल राख हो गया,
मस्त हुये राख को जलाना छोड़ दिया है।
जिसको उठाओ वो आ सिर पे बैठता,
हमने अब गिरते को उठाना छोड़ दिया है।
अब शराफत की किसी को कदर ही नही,
इसलिये "रैना"ने जमाना छोड़ दिया है। रैना"
दोस्तों को कितनी पसंद आती है ये रचना ??????
साकी ने आजकल पिलाना छोड़ दिया है,
हमने ने भी मैखाने में जाना छोड़ दिया है।
अब बेवफा दोस्तों की बाढ़ सी आ गई,
हर किसी को दोस्त बनाना छोड़ दिया है।
सच आतिशे इश्क में दिल राख हो गया,
मस्त हुये राख को जलाना छोड़ दिया है।
जिसको उठाओ वो आ सिर पे बैठता,
हमने अब गिरते को उठाना छोड़ दिया है।
अब शराफत की किसी को कदर ही नही,
इसलिये "रैना"ने जमाना छोड़ दिया है। रैना"
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