दोस्तों गौर फरमाना
राजनेता गर संभल जाये,
नेक रस्ते पर निकल जाये,
लोग समझे फर्ज अपना तो
देश का नक्शा बदल जाये। रैना"
प्यार की जब है शमा जलती,
ठोस दिल भी फिर पिघल जाये।
हम सबर कब तक यूं करेंगे,
दम न अपना ही निकल जाये।
राजनेता गर संभल जाये,
नेक रस्ते पर निकल जाये,
लोग समझे फर्ज अपना तो
देश का नक्शा बदल जाये। रैना"
प्यार की जब है शमा जलती,
ठोस दिल भी फिर पिघल जाये।
हम सबर कब तक यूं करेंगे,
दम न अपना ही निकल जाये।
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