rajindersharmaraina
Wednesday, January 21, 2015
दोस्तों आप की तव्वजो चांहूगा
भीड़ के इस जंगल में इन्सानों की कमी बहुत,
तोते पौथी रटते है पर विद्वानों की कमी बहुत,
मन की बंजर धरती पे पुष्प प्रेम के खिले कैसे,
गुलशन वीरान हो रहे बागवानों की कमी बहुत। रैना"
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