Saturday, January 3, 2015

मुक्तक मेला 30 शनिवार 03/01/2015
आज का मुक्तक आप सब को समर्पित
2 2 1 2 / 2 2 1 2 / 2 2 1 2 / 2 2

 मन में बसे हो तुम विदा होना नही साजन ,
हम तो तिरे अपने जुदा होना नही साजन,
"रैना" दिवाने प्यार की ही मांगते भिक्षा,
गर हो खता तो तुम खफा होना नही साजन। रैना"

बच्चे अब तो सुर में रो भी नही पाते,
मां हाथ में मोबाईल फोन थमा देती है। रैना"

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