Thursday, January 8, 2015

dil me utar kar dekho

क्यों रूठे रहते हो कुछ तो बोले ,
दिल में रहना है दरवाजा खोले,

2122 - 2122 - 2122 
 राज जाना ही नही है जिन्दगी क्या,
बेवजह उलझे रहे बारीकियों में।

टपोरी शेर
हमे रुमाल के जैसे इस्तमाल मत करना,
दिल के घर में बिछा ले गलीचे के जैसे। रैना"

जिंदगी के सफर को क्या नाम दू,
अब तलक तो तन्हाई में कटी है। रैना"

 भला प्यार कैसे बच जाये ख़ालिस,
जब इंसानों में मिलावट होने लगी ऱैना"
 है गम ये नही तू दगा दे गया,
अफ़सोस रोने की सजा दे गया। रैना"

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