दोस्तों आप की खिदमत में
उजड़ी हमने बस्ती देखी
मिटती हर इक हस्ती देखी।
हर शै अब तो मंहगी होती,
लेकिन जां तो सस्ती देखी।
उसके आशिक जो दीवाने,
उनमें हमने मस्ती देखी।
महंगाई से बचना मुश्किल,
नागिन बन के डसती देखी।
रैना"पानी के खातिर तो,
सागर की माँ भटकी देखी। रैना"
उजड़ी हमने बस्ती देखी
मिटती हर इक हस्ती देखी।
हर शै अब तो मंहगी होती,
लेकिन जां तो सस्ती देखी।
उसके आशिक जो दीवाने,
उनमें हमने मस्ती देखी।
महंगाई से बचना मुश्किल,
नागिन बन के डसती देखी।
रैना"पानी के खातिर तो,
सागर की माँ भटकी देखी। रैना"