सरे महफ़िल में चर्चा यही है,
हसीं तुझ सा तो कोई नही है।
रखा है हुस्न का ये खजाना,
गंगा ऐ नूर तुझ से बही है।
करे हम जो सही गल्त होता,
करे तू जो वही तो सही है।
असर जिस पे सनम हो न तेरा,
यही सच है न शै वो बनी है
करे तारीफ कैसे सनम की,
मेरा हमदम वही तो नबी है।
करे रैना"गुजारिश सुने तू,
लगन तेरी सजन अब लगी है।
हसीं तुझ सा तो कोई नही है।
रखा है हुस्न का ये खजाना,
गंगा ऐ नूर तुझ से बही है।
करे हम जो सही गल्त होता,
करे तू जो वही तो सही है।
असर जिस पे सनम हो न तेरा,
यही सच है न शै वो बनी है
करे तारीफ कैसे सनम की,
मेरा हमदम वही तो नबी है।
करे रैना"गुजारिश सुने तू,
लगन तेरी सजन अब लगी है।
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