तुम सामने इक बार आ जाओ,
मुद्दत से है इंतजार आ जाओ।
कुछ और तो हसरत नही मेरी,
करने तेरे दीदार आ जाओ।
भड़की हुई है आग दिल के घर,
जीना हुआ दुश्वार आ जाओ।
अब तिश्नगी दिल की नही बुझती,
हम पे करो उपकार आ जाओ।
वरना सफर जारी रहे वैसे,
होगा तभी भव पार आ जाओ।
है शाम ढलने को हुई रैना"
दूल्हा हुआ तैयार आ जाओ।
मुद्दत से है इंतजार आ जाओ।
कुछ और तो हसरत नही मेरी,
करने तेरे दीदार आ जाओ।
भड़की हुई है आग दिल के घर,
जीना हुआ दुश्वार आ जाओ।
अब तिश्नगी दिल की नही बुझती,
हम पे करो उपकार आ जाओ।
वरना सफर जारी रहे वैसे,
होगा तभी भव पार आ जाओ।
है शाम ढलने को हुई रैना"
दूल्हा हुआ तैयार आ जाओ।
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