rajindersharmaraina
Friday, November 27, 2015
सुबह ओ शाम की चिन्ता न कोई भी फ़िकर है,
सनम अब तो
तुझे देखने की तमन्ना बड़ी है,
बता दे तेरा घर रहे तू किधर है।
तलाशा बहुत पर न मिलता कही घर,
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment