बुझ जा शमा या जला दे मुझको,
मेरी वफ़ा का सिला दे मुझको।
मैं भटकता ही रहा हूं अक्सर,
मेरी मंजिल का पता दे मुझको।
मैंने कही बात अपने दिल की,
दिल में तेरे क्या बता दे मुझको।
कटती नही अब तंहा ये रातें,
अब हम जुबां तो मिला दे मुझको।
आबाद गुलशन करो तुम मेरा,
मैं सो रहा अब जगा दे मुझको।
कर दे अदा फ़र्ज़ अपना रैना"
काबिल इसी के बना दे मुझको। रैना"
मेरी वफ़ा का सिला दे मुझको।
मैं भटकता ही रहा हूं अक्सर,
मेरी मंजिल का पता दे मुझको।
मैंने कही बात अपने दिल की,
दिल में तेरे क्या बता दे मुझको।
कटती नही अब तंहा ये रातें,
अब हम जुबां तो मिला दे मुझको।
आबाद गुलशन करो तुम मेरा,
मैं सो रहा अब जगा दे मुझको।
कर दे अदा फ़र्ज़ अपना रैना"
काबिल इसी के बना दे मुझको। रैना"
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