मेरे बारे में यूं सोचा न करो,
रात दिन तुम ख़्वाब देखा न करो।
मैं बेकाबू बहकी महकी सी हवा,
बेज़ा मेरी राह रोका न करो।
जानते सब हो मगर क्यों हैं भले,
खुद से तो ऐसे ही धोखा न करो।
चुप रहे गम भी सहे सब की अदा,
मन की करते इन को टोका न करो।
है मजे से कट रही चैन बहुत,
हाल मेरा मुझसे पूछा न करो।
तू कमी अपनी छुपाये क्यों बता,
दूसरों के राज ढूंढा न करो।
रैन"को आराम मिलता न कभी,
देख हिम्मत उसकी चौंका न करो।
रात दिन तुम ख़्वाब देखा न करो।
मैं बेकाबू बहकी महकी सी हवा,
बेज़ा मेरी राह रोका न करो।
जानते सब हो मगर क्यों हैं भले,
खुद से तो ऐसे ही धोखा न करो।
चुप रहे गम भी सहे सब की अदा,
मन की करते इन को टोका न करो।
है मजे से कट रही चैन बहुत,
हाल मेरा मुझसे पूछा न करो।
तू कमी अपनी छुपाये क्यों बता,
दूसरों के राज ढूंढा न करो।
रैन"को आराम मिलता न कभी,
देख हिम्मत उसकी चौंका न करो।
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