Wednesday, November 25, 2015



दोस्तों ये मेरी ग़ज़ल आप के लिये

गम में भी खिल खिल के हंसने वाले,
 वो हैं मेरे दिल में बसने वाले।
उनकी बातें वो कम भाते हमको,
दिल की बातें दिल में रखने वाले।
सुन लेते चुप रह जाते हैं अक्सर,
दीवाने हम पर्दा ढकने वाले।
दुःख होता जब सोचे उनके बारे,
दोस्त बनते फनियर डसने वाले।
कुछ ऐसे भी जो बहकाते मुझको, 
इतनी जल्दी हम कब पटने वाले।
रैना"की मानो तुम्हारी मरजी,
लेकिन हम मय नाही चखने वाले। रैना"





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