दोस्तों के नाम चार लाइन
नही मिलता तेरे जैसा,जिसे अपना कहू दिलबर,
नही जब घर मेरा कोई कहां फिर मैं रहू दिलबर,
तुझे चिन्ता नही मेरी परेशां इसलिये रहता,
जुदाई की घनी पीड़ा भला कैसे सहू दिलबर। रैना"
नही मिलता तेरे जैसा,जिसे अपना कहू दिलबर,
नही जब घर मेरा कोई कहां फिर मैं रहू दिलबर,
तुझे चिन्ता नही मेरी परेशां इसलिये रहता,
जुदाई की घनी पीड़ा भला कैसे सहू दिलबर। रैना"
No comments:
Post a Comment