पल पल हर पल बदल रहा,पर मौसम सर्द आज भी है,
जख्म नासूर बने नही,पर दिल में दर्द आज भी है।
चोटें दिल पे इतनी लगी,चाहा कर भी उबर न पाये,
ये लब मजबूरी में हंसे,यूं मुखड़ा जर्द आज भी है।
बसता घर तोड़ कर मेरा,लोगों से हाल पूछते ये,
जिससे धोखा किया रहा,क्या जिन्दा मर्द आज भी है।
उससे रिश्ता मेरा रहा,हरगिज अब गैर का न होगा,
वो अपना सिर्फ मेरा,कायम वो फर्द आज भी है।
रैना"कोई करे गिला,ऐसी औकात तो न मेरी,
आ देखो तो जमी हुई,पुस्तक पर गर्द आज भी है। रैना"
जख्म नासूर बने नही,पर दिल में दर्द आज भी है।
चोटें दिल पे इतनी लगी,चाहा कर भी उबर न पाये,
ये लब मजबूरी में हंसे,यूं मुखड़ा जर्द आज भी है।
बसता घर तोड़ कर मेरा,लोगों से हाल पूछते ये,
जिससे धोखा किया रहा,क्या जिन्दा मर्द आज भी है।
उससे रिश्ता मेरा रहा,हरगिज अब गैर का न होगा,
वो अपना सिर्फ मेरा,कायम वो फर्द आज भी है।
रैना"कोई करे गिला,ऐसी औकात तो न मेरी,
आ देखो तो जमी हुई,पुस्तक पर गर्द आज भी है। रैना"
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