जिन्दगी को नही मिले करीब से,
बात करते सदा मिले हबीब से।
आदमी की यही अदा कमाल है,
यार करता रहे गिला नसीब से।
खूब अन्दाज है हसीं जनाब के,
प्यार है बेशुमार जां रकीब से।
फूल ख़ुश्बू बदल सके यकीं करो,
आजकल हादसें घटे अजीब से।
इश्क की आग में जले मरे नही,
डर नही अब लगे हमें सलीब से।
सोच ले हम सदा वफ़ा अदा करें,
बेहतर है यही बचे रहे फरेब से।
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