Friday, November 27, 2015



2 2  1  1 2  1  2   2   2  1  1  2 1 2
वो मुझसे अलग नही,मैं उसके करीब हूं,
मैं उसको न देख पाया बड़ा बदनसीब हूं।
दुश्मन न मिरा यहां सबका अजीज हूं,
अफ़सोस यही है खुद का रकीब हूं।
कोई न कमी यूं सबकुछ ही दिया किया,
लेकिन ये कमी मिरी मैं दिल का ग़रीब हूं।
अपने से दगा करे ये कैसा मिजाज है,
खुद का तो नही पता मैं इन्सां अज़ीब हूं।
तू रैन" नही  हिसाब है,
तू मत सोच ये कभी मैं माहिर तबीब हूं।  रैना"

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