वैष्णो माँ की जय जय जय
वैष्णो मेरी माँ तेरे दम से जहाँ,
तू यहां तू वहां ढूंढते हम कहां।
अर्श हो या धरा नूर तेरा चढ़ा,
दिन चढ़े रात हो हुक्म तेरा चला।
है हवा जो चली तेरी रहमत भली,
है इशारा तेरा जो कली है खिली।
टूट कर जो गिरा ये सितारा भला,
माँ खफा है हुई जान ले तू जरा।
काम ऐसा करो याद दुनिया करे,
हो जिक्र तेरा शाम जब वो ढ़ले। रैना"
सुप्रभात जी---- ----जय जय माँ
वैष्णो मेरी माँ तेरे दम से जहाँ,
तू यहां तू वहां ढूंढते हम कहां।
अर्श हो या धरा नूर तेरा चढ़ा,
दिन चढ़े रात हो हुक्म तेरा चला।
है हवा जो चली तेरी रहमत भली,
है इशारा तेरा जो कली है खिली।
टूट कर जो गिरा ये सितारा भला,
माँ खफा है हुई जान ले तू जरा।
काम ऐसा करो याद दुनिया करे,
हो जिक्र तेरा शाम जब वो ढ़ले। रैना"
सुप्रभात जी---- ----जय जय माँ
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